सत्ताधीशों की नीतियों पर सवाल उठाने वालों को राष्ट्रद्रोही कहना लोकतंत्र पर आघात : गोपालदादा तिवारी

विद्यार्थियों और युवाओं की समस्याओं को जानने 22 अगस्त को पुणे आएंगे राहुल गांधी

पुणे, 18 अगस्त। सत्ता पक्ष की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले लोगों को राष्ट्रद्रोही या नक्सली बताना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सत्ता में बैठे लोगों की गलतियों पर उंगली उठाने वालों को ‘दिमागी नक्सली’ कहना सत्तालोलुप और स्वार्थी मानसिकता का परिचायक है। यह आरोप महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाया है।

गोपालदादा तिवारी ने जारी प्रेस बयान में कहा कि विश्व में ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ का संदेश देने वाला भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कितना दोहरा, स्वार्थी और ढोंगी है, यह स्वयं प्रधानमंत्री के वक्तव्यों से स्पष्ट हो गया है। उन्होंने कहा कि देश के विद्यार्थी, युवा और नागरिक यदि अपने विवेक का उपयोग करते हुए देश के भविष्य और राष्ट्रहित के विषय में विचार करते हैं, नागरिक समाज के सदस्य अपनी बात रखते हैं तथा लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए सामाजिक आंदोलन खड़े होते हैं, तो इन्हें दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को ‘दिमागी नक्सली’ कहकर संबोधित करना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। लाल किले से लोकतंत्र पर इस प्रकार का प्रहार देश के लिए चिंताजनक है। प्रधानमंत्री पद की गरिमा को देखते हुए ऐसी टिप्पणी की अपेक्षा नहीं थी। देश में केवल चुनाव केंद्रित राजनीति करने, स्वायत्त संस्थाओं के कथित दुरुपयोग और सत्ता प्राप्ति के बाद भी विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों तथा छोटे उद्यमियों के हित में लोकाभिमुख शासन नहीं चलाए जाने के कारण ही लोकतंत्र में विभिन्न स्तरों पर आवाजें उठ रही हैं।

गोपालदादा तिवारी ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री की परिभाषा में ‘दिमागी नक्सली’ आखिर कौन हैं? उन्होंने कहा कि नक्सलवादी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े होते हैं और उनके खिलाफ सरकार कानून एवं पुलिस कार्रवाई कर सकती है। लेकिन सत्ता की नीतियों पर सवाल उठाने वाला नागरिक, विद्यार्थी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता अथवा राजनीतिक विरोधी राष्ट्रविरोधी नहीं हो सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक सत्ता की लालसा के कारण लोकतंत्र पर तानाशाही की छाया डालने की कोशिश का चेहरा अब सामने आ गया है।

उन्होंने कहा कि देश में क्या सत्ताधारियों से सवाल न पूछने वाले, हर बात पर चुप रहने वाले और बिना अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किए शासन की हर बात स्वीकार करने वाले नागरिक ही अपेक्षित हैं? ‘दिमागी नक्सली’ जैसी टिप्पणी से यही संदेश जाता है। भारत में लोकतंत्र है और प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र रूप से विचार करने तथा संविधान की मर्यादा में रहते हुए अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सत्ता की लालसा में इस मूल भावना को सुविधानुसार भूल जाता है।

तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहली बार संसद की सीढ़ियों पर सिर झुकाया, लेकिन बाद में संसद के प्रति अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व का सामना करने से बचते रहे। दूसरी बार संविधान के समक्ष नतमस्तक होने की तस्वीर सामने आई, लेकिन इसके बावजूद संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना और कथित गला घोंटने की कोशिशें जारी रहीं। अब नागरिकों को शासन के केंद्र में बताने के साथ ही उनके संवैधानिक अधिकारों पर दबाव बनाने और धौंस जमाने का प्रयास भी सामने आ रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के सामने संकट की स्थिति है। ऐसे समय में विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने तथा विद्यार्थी वर्ग की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 22 अगस्त को पुणे आ रहे हैं।

गोपालदादा तिवारी ने कहा कि ‘विद्या के माहेरघर’, महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी और सामाजिक क्रांतियों की भूमि पुणे में राहुल गांधी का आगमन पुणे और महाराष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थी वर्ग से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित रहने और अपनी ज्वलंत समस्याओं, शिक्षा से जुड़े मुद्दों तथा भविष्य से संबंधित चिंताओं को राहुल गांधी के समक्ष रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आज देश की युवा शक्ति के सामने शिक्षा, रोजगार, अवसर और भविष्य से जुड़े अनेक प्रश्न हैं। ऐसे में युवाओं की आवाज को लोकतांत्रिक मंच मिलना समय की आवश्यकता है। लोकतंत्र में विरोध देशद्रोह नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में सत्ता को जवाबदेह बनाने का माध्यम है।

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