लाडकी बहन योजना में 81 लाख अपात्र लाभार्थियों को करोड़ों रुपये का भुगतान, दोषी अधिकारियों से वसूली की जाए: कांग्रेस

मुंबई, 1 जून। महाराष्ट्र सरकार की बहुचर्चित मुख्यमंत्री लाडकी बहन योजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत करीब 81 लाख अपात्र महिलाओं को सरकारी धन का लाभ दिया गया, जिससे राज्य के खजाने पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की न्यायिक और प्रशासनिक जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी कार्रवाई की मांग की है।


कांग्रेस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में गोपालदादा तिवारी ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई लाडकी बहन योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। लेकिन अब सरकार द्वारा बड़ी संख्या में लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर सूची से बाहर किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आवेदन स्वीकृत किए गए और धनराशि वितरित की गई, तब महिला एवं बाल विकास विभाग, वित्त विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों को इन आवेदनों की अपात्रता का पता क्यों नहीं चला।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के अनुसार 81 लाख लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं और इनके नाम हटाने से प्रतिमाह लगभग 1200 करोड़ रुपये की बचत होने वाली है, तो अब तक राज्य के खजाने पर पड़े लगभग 18 हजार करोड़ रुपये के कथित अवैध वित्तीय बोझ की जिम्मेदारी कौन लेगा।


अधिकारियों पर गंभीर आरोप
तिवारी ने आरोप लगाया कि संबंधित विभागों के सचिवों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों ने अपनी संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि लाखों अपात्र लोगों को लाभ दिया गया है तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राज्य की वित्तीय व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है।


कांग्रेस नेता ने मांग की कि जिन अधिकारियों की लापरवाही या भूमिका के कारण सरकारी धन का गलत वितरण हुआ, उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं और राज्य को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई उन्हीं से कराई जाए।

चुनावी लाभ के लिए योजना चलाने का आरोप

तिवारी ने आरोप लगाया कि इस योजना का उपयोग विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया। उन्होंने कहा कि अपात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलने से न केवल सरकारी धन का नुकसान हुआ, बल्कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।


उन्होंने कहा कि यदि मतदान के बाद प्रशासन को यह पता चलता है कि हजारों लाभार्थी आयु सीमा से बाहर थे या सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद योजना का लाभ ले रहे थे, तो यह प्रशासनिक अक्षमता का गंभीर उदाहरण है।

मुख्य सचिव, राज्यपाल और उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग

कांग्रेस ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्यपाल तथा न्यायपालिका से इस पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। तिवारी ने कहा कि मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।


उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस कार्यकर्ता संबंधित अधिकारियों की पहचान उजागर कर जनआंदोलन छेड़ेंगे और जनता के सामने उनकी जवाबदेही तय करेंगे।

सरकार की नीतियों पर भी साधा निशाना

कांग्रेस प्रवक्ता ने महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, कर्ज के बोझ, अपराध और प्रशासनिक अव्यवस्था के बीच इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताएं सरकार की नीति और नियोजन की विफलता को दर्शाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत निर्णयों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।


कांग्रेस ने मांग की है कि लाडकी बहन योजना में अपात्र लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने के पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों को दंडित किया जाए और राज्य के खजाने को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए।

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