अंधविश्वास का फैलना सरकार की विफलता: कांग्रेस का आरोप

प्रदेश प्रवक्ता गोपालदादा  तिवारी ने कहा-अंधश्रद्धा कानून को फडणवीस सरकार ने किया कमजोर

पुणे। महाराष्ट्र में बढ़ते अंधविश्वास और ढोंगी बाबाओं के प्रभाव को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। 

कांग्रेस के वरिष्ठ राज्य प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने पुणे कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में कहा कि राज्य में अंधविश्वास का बढ़ना शासन व्यवस्था की विफलता का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार जब लोग अपने व्यवहार और निर्णय प्रक्रिया में तार्किक सोच का उपयोग नहीं करते, तो भय पैदा होता है और इसका फायदा उठाकर ढोंगी लोग निर्दोषों का शोषण करते हैं। विशेष रूप से महिलाएं अंधविश्वास का शिकार बन रही हैं और कई बार गंभीर अत्याचारों की भी शिकार हो रही हैं।


तिवारी ने कहा कि प्रगतिशील माने जाने वाले महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार ने अंधश्रद्धा और जादू-टोना विरोधी कानून लागू किया था, लेकिन देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में इस कानून को कमजोर करने का काम किया गया। 

उन्होंने आरोप लगाया कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार और जनजागृति के अभाव में आज भी लोग अंधविश्वास के जाल में फंस रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जब लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास कम हो जाता है, तो वे समस्याओं के समाधान के लिए बाबाओं और ढोंगी साधुओं का सहारा लेने लगते हैं। यदि सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जागरूकता फैलाने में सक्रिय होती, तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते।


तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक संरक्षण के कारण ढोंगी बाबाओं का प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने “भोंदू बाबा खरात” प्रकरण का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि उस समय सरकार और प्रशासन क्या कर रहे थे। साथ ही, एक समाचार के संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई के बजाय पत्रकारों पर ही दबाव बनाया गया।


उन्होंने कहा कि भक्ति व्यक्ति की आंतरिक आस्था होती है, न कि दिखावा। लोगों को त्वरित समाधान के लालच में अंधविश्वास की ओर नहीं जाना चाहिए। सरकार का कर्तव्य है कि वह लोगों में वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद और जागरूकता को बढ़ावा दे।


तिवारी ने महात्मा ज्योतिराव फुले, छत्रपति शाहू महाराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर और गोपाल गणेश आगरकर जैसे समाज सुधारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को तर्क, समानता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की शिक्षा दी।


उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51 (क) का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और सुधार की भावना को बढ़ावा दे।

इस अवसर पर सुभाष थोरवे, भोला वांजळे, तात्या शिर्के, आबा जगताप, गणेश मोरे, राजेश सुतार, संजय अभंग, सुभाष जेधे, गणेश शिंदे, उदय लेले और नरेश आवटे सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।  


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