“ज्ञानोबा-तुकोबा का अपमान करने वाली और शिवराज्याभिषेक को नकारने वाली प्रवृत्तियां फिर सिर उठा रही हैं” — कांग्रेस ने की तीखी आलोचना
पुणे, 27 अप्रैल: महाराष्ट्र में हाल ही में दिए गए एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। धीरेंद्र शास्त्री द्वारा नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बारे में कथित रूप से किए गए आपत्तिजनक और काल्पनिक बयान पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया कि यह बयान भाजपा नेतृत्व की मौजूदगी में दिया गया, जो महाराष्ट्र की अस्मिता पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे “शिव छत्रपति के गौरवशाली इतिहास को कलंकित करने का निंदनीय प्रयास” बताया।
गोपालदादा तिवारी ने आगे कहा कि राज्य में किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ते कर्ज जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। इन समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर धार्मिक और भावनात्मक विवाद खड़े किए जा रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने महाराष्ट्र की संत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस भूमि ने संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत निवृत्तिनाथ, सोपानदेव और मुक्ताबाई जैसे महान संतों को जन्म दिया, वहीं आज उन्हीं संतों का अपमान करने वाली प्रवृत्तियां फिर से सक्रिय हो रही हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया कि ऐसी “महाराष्ट्र विरोधी प्रवृत्तियों” को भाजपा का संरक्षण मिल रहा है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
महायुति सरकार में शामिल अन्य दलों पर भी निशाना साधते हुए तिवारी ने कहा कि सत्ता के लालच में वे महाराष्ट्र के गौरव का अपमान सहन कर रहे हैं और इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने इसे “महाराष्ट्र की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति” बताया।
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