पुणे में भाजपा–शिवसेना (शिंदे गुट) का गठबंधन टूटा, अलग-अलग लड़ेंगे मनपा चुनाव

सभी सीटों पर उतारे गए प्रत्याशी, मुकाबला हुआ रोचक

पुणे। राज्य की सत्ता में साझेदार भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) का पुणे महानगरपालिका चुनाव में गठबंधन टूट गया है। यद्यपि मुंबई में दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन पुणे में सीटों के बंटवारे को लेकर स्थानीय नेतृत्व के बीच तीखी तनातनी के चलते यह युति समाप्त हो गई। मंगलवार सुबह शिवसेना (शिंदे गुट) के शहर अध्यक्ष प्रमोद नाना भानगिरे ने मीडिया से बातचीत में गठबंधन टूटने की औपचारिक घोषणा की।


प्रमोद नाना भानगिरे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी अंतिम समय तक शिवसेना को भ्रम में रखती रही। उन्होंने कहा, “अब हमें स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है, इसलिए पुणे महानगरपालिका चुनाव के लिए भाजपा के साथ हमारा गठबंधन समाप्त हो चुका है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस निर्णय पर पुनर्विचार की कोई संभावना नहीं है।


उल्लेखनीय है कि महानगरपालिका चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि मंगलवार थी। इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने लगभग सभी प्रभागों में अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बनी हुई है कि यदि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर कोई सहमति बनती है, तो नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि तक कुछ सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं। 


इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) भी पुणे में भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव नहीं लड़ रही है। परिणामस्वरूप, पुणे महानगरपालिका चुनाव में राज्य सरकार में शामिल तीनों सहयोगी दल—भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार गुट)—एक-दूसरे के विरुद्ध मैदान में उतरते नजर आएंगे। भाजपा ने पुणे की सभी अन्य मित्र दलों के साथ 165 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।


हालांकि तीनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की ओर से यह कहा जा रहा है कि यह मुकाबला ‘मैत्रीपूर्ण’ रहेगा, लेकिन जमीनी स्तर पर त्रिकोणीय संघर्ष तय माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दल किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाते हैं और मतदाता किसे प्राथमिकता देते हैं।
 

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