प्रदेश प्रवक्ता गोपाल दादा तिवारी ने कहा— ईरान प्रतिनिधिमंडल का खुलासा, वास्तविकता पर आधारित
पुणे। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कहा है कि जब देश के “भाषणजीवी” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय हित के निर्णय समय पर नहीं लेते, तब जनता और विपक्ष स्वयं विदेश नीति का दायित्व उठाकर राष्ट्रहित की रक्षा करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इसका उदाहरण ईरान के निर्णय से स्पष्ट रूप से सामने आया है।
तिवारी ने कहा कि ईरान ने होर्मुज़ से भारत के दो जहाजों को मुक्त करते समय भारत सरकार का उल्लेख तक नहीं किया, बल्कि इसका पूरा श्रेय स्पष्ट रूप से भारतीय जनता को दिया।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भारत का पुराना मित्र ईरान जब इजरायल की ओर से धमकियों का सामना कर रहा था, उस समय इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जिनके खिलाफ कई देशों में कार्रवाई की मांग उठ चुकी है, ने प्रधानमंत्री मोदी को तात्कालिक रूप से बुलाकर एक मेडल प्रदान किया। तिवारी के अनुसार, इसके माध्यम से इज़राइल ने अपने कृत्यों के लिए भारत की अप्रत्यक्ष स्वीकृति प्राप्त की और अगले ही दिन ईरान पर इज़राइल और यूनाइटेड स्टेट द्वारा हमला किया गया।
उन्होंने दावा किया कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनोई को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ा, किंतु भारत सरकार ने पारंपरिक मित्र होने के बावजूद तत्काल शोक संदेश तक जारी नहीं किया, बल्कि अत्यंत विलंब से प्रतिक्रिया दी।
गोपालदादा तिवारी ने कहा कि भारत की जनता इस घटना से आहत हुई और देशभर में ईरान के समर्थन तथा अली खामेनेई के प्रति शोक संदेशों की बाढ़ आ गई। भारत सरकार के रुख से ईरान आहत हुआ, लेकिन भारतीय जनता के समर्थन से वह संतुष्ट हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि ईरान का एक पूर्णतः निःशस्त्र युद्धपोत भारत के आमंत्रण पर विशाखापट्टनम आया था, जहां उसके सैनिकों ने भारतीय राष्ट्रपति को सलामी दी। किंतु वापसी के दौरान, भारत के समीप ही, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों की अनदेखी करते हुए उस निःशस्त्र जहाज को डुबो दिया।
तिवारी ने आरोप लगाया कि जहाज से आपातकालीन एसओएस कॉल सबसे पहले भारत को भेजा गया, लेकिन संभवतः अमेरिका की अनुमति न मिलने के कारण भारत सरकार या सेना ने कोई कदम नहीं उठाया। इसके विपरीत, श्रीलंका जैसे छोटे देश ने अपनी सीमित क्षमता के बावजूद इरानी नागरिकों को बचाने का प्रयास किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर शोक संदेश भी जारी नहीं किया ? इस घटना के बाद भारतीय जनता ने फिर दुःख व्यक्त किया और विभिन्न स्तरों पर अपने ही सरकार की आलोचना की।
कांग्रेस पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश प्रवक्ता गोपाल दादा तिवारी के अनुसार, देश की विदेश नीति और संप्रभुता की स्थिति को देखते हुए विपक्ष को आगे आना पड़ा। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने देश के प्रमुख माध्यमों में लेख लिखकर स्पष्ट किया कि वर्तमान भारत सरकार की विदेश नीति, भारत या भारतीय जनता की नीति नहीं है।
उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि ईरान ने होर्मुज़ से भारतीय जहाजों को मुक्त करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय भारत सरकार के कारण नहीं, बल्कि भारतीय जनता के प्रति मित्रता, संवेदनशीलता और आत्मीयता के कारण लिया गया है।
तिवारी ने अपने बयान में कहा कि इस प्रकार भारत की जनता और विपक्ष ने विदेश नीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए युद्ध जैसी परिस्थितियों में देश को संभावित ऊर्जा संकट से कुछ समय के लिए बचाने का प्रयास किया है। उन्होंने इसका श्रेय कांग्रेस संसदीय दल की नेता एवं पूर्व लोकसभा विपक्ष नेता सोनिया गांधी तथा देश के संवेदनशील और मानवतावादी ईरान-समर्थक सामाजिक वर्गों को दिया।
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