गुंडागर्दी विरोधी भाषण और प्रत्याशी चयन में विरोधाभास!

पुणे में अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पर सवालों की बौछार

पुणे। “पुणे से गुंडागर्दी का खात्मा करेंगे” जैसी कड़ी भाषा बोलने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अब स्वयं विरोधाभासों के घेरे में आ गई है। पुणे महानगरपालिका चुनाव में कुख्यात अपराधी गजा मारणे की पत्नी को टिकट दिए जाने से पार्टी की नीति और नीयत पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
खंडणी, दहशत, मारपीट और हत्या जैसे संगीन अपराधों की पृष्ठभूमि वाला गजा मारणे इस समय जेल में है। ऐसे में उसकी पत्नी जयश्री मारणे को वार्ड क्रमांक 10 से आधिकारिक प्रत्याशी बनाकर एबी फॉर्म दिए जाने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अब खुलेआम यह सवाल पूछा जा रहा है—

“गुंडागर्दी पर लगाम या गुंडों को संरक्षण?”
कोयता गैंग पर कार्रवाई की बात, लेकिन गुंडों के घर से राजनीति!
कुछ माह पूर्व अजित पवार ने पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि “कोयता गैंग को जड़ से खत्म किया जाए” और पुलिस बल बढ़ाकर अपराध पर नियंत्रण किया जाए। ऐसे सख्त निर्देशों के बाद उसी पार्टी द्वारा एक कुख्यात अपराधी की पत्नी को चुनावी मैदान में उतारना शब्द और कर्म के बीच गहरी खाई को उजागर करता है—ऐसी तीखी आलोचना की जा रही है।


गौरतलब है कि गजा मारणे कोथरूड में एक दोपहिया सवार पर जानलेवा हमले के मामले में जेल में है। यह पीड़ित केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोळ के कार्यालय से जुड़ा बताया जाता है। ऐसे गंभीर प्रकरण के बावजूद प्रत्याशी बनाए जाने से यह संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है कि क्या गुंडों को परोक्ष राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है?
राष्ट्रवादी में विवाद सुलझाने का फॉर्मूला—प्रत्याशी बनाओ?


इधर, कुछ दिन पहले राष्ट्रवादी की नेता और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर की सार्वजनिक आलोचना करने वाली रुपाली ठोंबरे पाटील को भी वार्ड क्रमांक 2 से टिकट दिया गया है। आलोचना के बाद सीधे अजित पवार से मुलाकात और फिर प्रत्याशिता—
इस पर तंज कसा जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस में विवाद सुलझाने का सबसे आसान रास्ता “उम्मीदवारी” है।


एक बेटा भाजपा में, दूसरा राष्ट्रवादी में!
राजनीतिक विसंगतियां यहीं खत्म नहीं होतीं। राष्ट्रवादी के नेता दीपक मानकर के दोनों बेटे महानगरपालिका चुनाव में आमने-सामने हैं—एक भाजपा से और दूसरा राष्ट्रवादी से। अब सवाल यह उठ रहा है कि दीपक मानकर किसके लिए प्रचार करेंगे, या फिर दोनों पक्षों को साधने की रणनीति अपनाएंगे?
पुणेकर मतदाताओं की समझ की परीक्षा?


गुंडागर्दी विरोधी घोषणाएं, कानून-व्यवस्था पर सख्त भाषण और जमीन पर विवादास्पद प्रत्याशियों को टिकट—
इन सबको देखते हुए पुणेकर मतदाता यह सवाल कर रहे हैं कि यह चुनाव विकास के मुद्दों पर है या राजनीतिक सुविधा के आधार पर?


महानगरपालिका चुनाव नजदीक आते ही राष्ट्रवादी कांग्रेस की प्रत्याशी चयन नीति ने विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे दिया है। नतीजतन, पुणे का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।

टिप्पणियाँ