आचार संहिता व नैतिक मूल्यों की युति सरकार द्वारा अवहेलना — कांग्रेस का आरोप

सत्ताधारी दलों पर कार्रवाई कर चुनाव आयोग अपनी स्वायत्तता सिद्ध करे — गोपालदादा तिवारी

 पुणे । महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर चुनाव आचार संहिता, नैतिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के खुले उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर जनता को गुमराह करने के लिए सरकार ने चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर महानगर पालिका चुनावों की घोषणा को जानबूझकर लंबित रखा। इस दौरान प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से सरकारी खर्च पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

चुनाव घोषणा में देरी कर विकास का कृत्रिम आभास

तिवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में महानगरपालिका चुनावों की घोषणा में जानबूझकर की गई देरी और उसी अवधि में करोड़ों रुपये की तथाकथित विकास योजनाओं की घोषणाएं इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि चुनाव आयोग सत्ताधारी गठबंधन के दबाव में कार्य कर रहा है।

आचार संहिता उल्लंघन पर नोटिस जारी करने की मांग

उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता और स्वायत्तता सिद्ध करने के लिए सत्ताधारी दलों को आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में कम से कम कारण बताओ नोटिस जारी करने चाहिए।

प्रशासनिक कार्यों का श्रेय लेने की निंदनीय प्रवृत्ति

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि नागरिकों के कर के धन से पूरे किए गए ड्रेनेज, जलापूर्ति और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों का उद्घाटन कर राजनीतिक श्रेय लेना एक श्रेयजीवी मानसिकता को दर्शाता है।

नियमित प्रशासनिक घोषणाओं को चुनावी लाभ के लिए उपयोग

उन्होंने कहा कि चुनाव घोषणा के दौरान जानबूझकर एक ही दिन में नियमित प्रशासनिक कार्यों की घोषणाएं करना केवल श्रेय हथियाने का प्रयास है, जो अत्यंत निंदनीय और केविलवाना आचरण है।

चुनाव टालकर नगर निगम की आर्थिक संपदा का दुरुपयोग

गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया कि अनैतिक और असंवैधानिक तरीके से सत्ता में आई महायुति सरकार ने नगर निगम चुनावों को लंबे समय तक टालकर नगर निकायों की आर्थिक गंगाजली का लाभ उठाया।

विकास बैकलॉग पूरा करने में सरकार पूरी तरह विफल

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक काल में विकास का लंबित कार्यभार पूरा करने में सरकार पूरी तरह असफल रही, इसी कारण चुनाव की घोषणा के समय विकास का झूठा आभास पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

आचार संहिता और संवैधानिक मूल्यों को तिलांजलि

उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि चुनाव आयोग की घोषणा के दिन और समय का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करना आचार संहिता और संवैधानिक मूल्यों का घोर उल्लंघन है। यह सत्ताधारी दल की गंभीर नैतिक गिरावट और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक दुखद संकेत है।

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